14 सितंबर 2020 को श्री औरोबिंदो इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में हिंदी दिवस के उपलक्ष में एक विचार गोष्ठी “अनुभूति की अभिव्यक्ति” का आयोजन वर्चुअल प्लेटफार्म गूगल मीट के द्वारा किया गया । कार्यक्रम में सर्वश्री डॉ. दुर्गेश कुमार मिश्रा, संस्था के डायरेक्टर, एवं मैकेनिकल विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सीएस सत्संगी, डॉ. नितिका वत्स विभागाध्यक्ष कंप्यूटर साइंस विभाग, प्रोफेसर अमित होलकर विभागाध्यक्ष इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग, डॉ. उन्मेष मंडलोई विभागाध्यक्ष एमबीए विभाग, प्रोफेसर जी के वर्मा विभागाध्यक्ष सिविल इंजीनियरिंग विभाग, प्रोफेसर रणविजय सिंह परमार इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग एवं संचालक डॉ.अनुपम मंडलोई संस्था के उप – प्राचार्य ने अपने अनुभवों को हिंदी दिवस के उपलक्ष में साझा किया।
1. प्रोफेसर सत्संगी के अनुसार हिंदी को ग्लोबल भाषा बनाने पर ही उसकी उपयोगिता बढ़ाई जा सकती है और भारत में युवाओं को इसे अपनाना चाहिए ।
2. प्रोफेसर अमित होल्कर ने बताया कि हिंदी दिवस क्यों मनाया जाता है सन 1949 में हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा देने के लिए एक सभा का आयोजन किया गया उसी में यह निर्णय लिया गया कि 14 सितंबर को हर वर्ष हिंदी दिवस मनाया जाए ।
3. प्रोफेसर वर्मा ने हिंदी के ज्यादा से ज्यादा उपयोग पर बल दिया एवं कहा कि छात्रों को बिना हिचक हिंदी का उपयोग करना चाहिए । हिंदी को मात्र 1 दिन के लिए ही नहीं, वर्ष भर व्यावहारिक भाषा जैसे उपयोग करना चाहिए ।
4. डॉ. उमेश मंडलोई ने हिंदी के उपयोग को बढ़ाने हेतु तकनीकी शिक्षा में हिंदी पुस्तकों के ज्यादा प्रचलन पर बल दिया।
5. संस्था के निदेशक डॉ. दुर्गेश कुमार मिश्रा द्वारा हिंदी के अधिकाधिक उपयोग हेतु छात्रों एवं शिक्षकों का आह्वान किया गया। जैसे अन्य देश अपनी मातृभाषा का सम्मान करते हैं उसी तरह हिंदी भाषा का भी प्रत्येक भारतीय नागरिक द्वारा सम्मान किया जाना चाहिए एवं इसे घरेलू भाषा के रूप में भी प्रयोग करना चाहिए ।
6. प्रोफेसर रणविजय परमार ने कहा कि युवाओं को अंग्रेजी भाषा का ज्ञान भी होना चाहिए एवं हिंदी पर गर्व होते हुए इसे व्यावहारिक भाषा के रूप में उपयोग किया जाना चाहिए ।
7. डॉ. नितिका वत्स ने कहा “हिंदी है हम हिंदुस्तान हमारा” नारे को हिंदी दिवस के उपलक्ष में याद किया।
7. अंत में डॉ अनुपम मंडलोई ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि भाषा एक संप्रेषण का माध्यम मात्र है , चाहे वह हिंदी हो, अंग्रेजी हो, चीनी और जापानी हो, ज्ञान का भाषा से कोई संबंध नहीं है ।
“अनुभूति की अभिव्यक्ति” गोष्टी में विशेष रूप से संस्था के निदेशक एवं प्रोफेसर सत्संगी ने हिंदी भाषा से जुड़े अपने अनुभवों को साझा किया ।
कार्यक्रम की भाषा हिंदी होने के कारण इसे बड़े ही रोचक रूप में अनुभव किया गया ।
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